प्रागैतिहासिक जीव पार्क
लगभग 4600 करोड़ वर्ष पूर्व पृथ्वी का निर्माण हुआ था । पृथ्वी के इतिहास की इस अवधि के दौरान करोड़ों पौधे और जंतु विकसित हुए । लम्बी पर्वत श्रृंखलाएँ – उठीं और मिट गईं और महादेश विखंडित हुए और ग्लोब के इधर – उधर स्थान बनाये, फिर से टकराये और नवीन पृथ्वी लोक का निर्माण हुआ ।

विभिन्न समयों पर जीवाश्म अभिलेख में भिन्न प्रकार के जीवधारी देखे गये । समय के प्रवाह में जो मामूली परिवर्तन जानवरों में पाये गये, करोड़ों वर्षों बाद, बिल्कुल भिन्न जानवर उत्पन्न हुए । काल गति के क्रम में ये क्रमिक परिवर्तन ही क्रम विकास कहे गये । सभी जीव धारियों में पीढ़ी परिवर्तन होता है ।

अब, कोई भी प्रागैतिहासिक जंतु जीवित नहीं है । आज की दुनिया के जानवर बिल्कुल भिन्न हैं। क्रम विकास की यह प्रक्रिया आज भी जारी है ।

2720 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में फैला यह प्रागैतिहासिक पार्क भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में अपने ढंग का अनोखा पार्क हे । यह पार्क आपको अद्भुत अनुभव प्रदान करता है जिससे आप प्रागैतिहासिक दुनिया में विचरण करने लगते हैं जहाँ 500-10,000 करोड़ वर्ष पहले जीवधारियों की विभिन्न प्रजातियाँ समुद्र में और साथ ही साथ स्थल पर रहती थीं ।

जीवधारियों के साथ प्रागैतिहासिक जीवन के परिवेश का आनन्द लेने के लिए कृपया प्रागैतिहासिक पार्क घूमें ।

 
 
         


         
कॉपीराइट 2015, @ आंचलिक विज्ञान केन्द्र,  
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